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5.16 भुवनकोशका वर्णन

 Patgendraa

जहां तक सूर्य का प्रकाश है और जहां तक तारामंडल के सहित चंद्र देव दीख पडते हैं, वहां तक भू मंडल का विस्तार है।1

इसमें सात समुद्र हैं, जिनके कारण इस भूमंडल में सात द्वीपों का विभाग हुआ।

इन सब का परिमाण और लक्षणों के सहित पूरा विवरण क्या है?2

जो मन भगवान के इस गुण में, स्थूल विग्रह में, लग सकता है उसी का उनके वासुदेव स्वरुप,एक ,स्वयं प्रकाश, निर्गुण, ब्रह्म रूप, सूक्ष्मतम स्वरूप में भी लगना संभव है; इस विषय का विशेष रूप से वर्णन क्या है?3.

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परा अपरा ,पुरुष प्रकृति।

मैं संपूर्ण जगत का प्रभव तथा प्रलय हूं अर्थात संपूर्ण जगत का मूल कारण हूं। पृथ्वी, जल अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार, इस प्रकार यह आठ प्रकार से विभाजित मेरी जड़ अर्थात अपरा प्रकृति है। इससे दूसरी जिससे यह संपूर्ण जगत धारण किया जाता है मेरी जीव रूपा परा अर्थात चेतन प्रकृति जान।। ।।श्री कृष्ण ।।