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5.15 भरतके वंश का वर्णन

 सुमति

देवताजित 

देवधुम्न 

परमेष्ठि 

प्रतीह-" इसने अन्य पुरुषों को आत्म विद्या का उपदेश कर स्वयं शुद्ध चित्त होकर परम पुरूष श्री नारायण का साक्षात अनुभव किया था।"

गय



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20/5/20जन्म मृत्यु।

*संपूर्ण प्राणी जन्म से पहले है अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट हो जाने वाले हैं,केवल बीच में ही प्रकट है; फिर ऐसी स्थिति में क्या शोक करना।* श्री कृष्ण